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कॉर्पोरेट्स को उम्मीद है कि आर्थिक स्थिति सामान्य होने में लगभग 17 महीने लगेंगेः टीआरए व्हाइटपेपर

कॉर्पोरेट चिंताओं के शीर्ष पर वैश्विक मंदी, स्वास्थ्य संकट, धूमिल आर्थिक दृष्टिकोण और सामाजिक अशांति

मुंबई: कंज्यूमर इनसाइट पर एक सर्वे जारी करने के एक पखवाड़े बाद, टीआरए रिसर्च, एक प्रमुख कंज्यूमर इनसाइट और ब्रांड एनालिटिक्स कंपनी ने आज अपनी दूसरी रिपोर्ट “टीआरए के कोरोनवायरस कॉर्पोरेट इनसाइट्स 2020“ जारी की, जो कि 16 शहरों में की गई एक रिसर्च पर एक व्हाइटपेपर है। ये सर्वे देश के 16 शहरों में 08 अप्रैल से 04 मई, 2020 तक आयोजित किया गया, जिसमें 101 कॉर्पोरेट रिस्पॉन्डेंट्स ने हिस्सा लिया। टीआरए सर्वे ये संकेत देता है कि कॉर्पोरेट्स, औसतन, यह समझते हैं कि आर्थिक सामान्य स्थिति प्राप्त करने में 66.1 सप्ताह (16.5 महीने) लगेंगे, जबकि पूर्ण स्वास्थ्य सामान्य स्थिति के लिए, उन्हें लगता है कि इसमें 15 सप्ताह (3.8 महीने) से अधिक लगेंगे।

एन.चंद्रमौली, सीईओ, टीआरए रिसर्च, ने इसके परिणामों के बारे में विस्तार से बताया कि “कॉर्पोरेट इंडिया की सबसे बड़ी चिंता वैश्विक मंदी की है, जो वरी इंडेक्स (चिंता सूचकांक) पर 66 प्रतिशत है, इसके बाद 59 प्रतिशत पर स्वास्थ्य संकट को दूर करने में भारत की अक्षमता है। बिज़नेस सर्वाइवल के तीन महत्वपूर्ण कारक, भारत का कमजोर आर्थिक दृष्टिकोण और सामाजिक अशांति, सभी में 57 प्रतिशत का एक चिंता सूचकांक था, जो कई सहवर्ती चुनौतियों को दिखा रहा था, जिससे के इस समय कॉर्पोरेट भारत इस समय जूझ रहा था। ग्राहकों के विश्वास में आ रही अस्थिरता कुछ चिंता बढ़ाते हैं और 39 प्रतिशत के साथ चिंता सूचकांक में सबसे कम रहता है, संभवतः कॉर्पोरेट्स को बड़े पैमाने पर चिंतित करने वाले वे व्यवधान हैं जो कि आने वाले दिनों में सामने आएंगे।”

चंद्रमौली ने कहा कि “कोविड के प्रभाव को देखते हुए, इम्पैक्ट इंडेक्स पर 75 प्रतिशत के साथ आय सबसे अधिक प्रभावित होने वाला पहलू है। इसके बाद विज्ञापन में 64 प्रतिशत का प्रभाव है,  जिसमें स्पष्ट होता है कि पहली कटौती तुरंत नियंत्रणीय खर्चों में थी, क्योंकि लॉकडाउन के कारण विशेष रूप से कई क्षेत्रों के दौरान नगण्य मांग रह गई है।”

सर्वेक्षण से पता चला कि प्रमुख प्रबंधन के बीच कोपिंग-वरी अंतर 32 प्रतिशत पर सबसे अधिक था, और शायद सब कुछ एक साथ सामना करने के लिए शीर्ष प्रबंधन के लिए चिंताएं काफी अधिक हैं। शीर्ष प्रबंधन की अन्य चुनौती शायद उनके व्यक्तिगत डर और चिंताओं के बावजूद उन्हें पेश करने की ताकत का बाहरी प्रदर्शन है।

कॉर्पोरेट्स की प्राथमिकता पर, ओपैक्स की कमी 69.5 प्रतिशत के साथ प्राथमिकता के मामले पर शीर्ष स्थान है, कैपएक्स में कमी 65.5 प्रतिशत पर दूसरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है, बिजनेस स्ट्रैटजी 64.5 प्रतिशत की प्राथमिकता के साथ तीसरे स्थान पर है और कंपनी का संचालन 56.5 प्रतिशत के साथ प्राथमिकता सूची पर चौथे नंबर पर है। इसके विपरीत कई लोगों का मानना है कि कॉर्पोरेट्स के लिए मैनपावर लागत में कटौती काफी आखिरी कदम है, जो कि उनकी प्राथमिकता सूची में 51.5 प्रतिशत के साथ पांचवें स्थान पर है।

टीआरए रिसर्चः परिचय

टीआरए रिसर्च, कॉमनिसिएंट ग्रुप कंपनी है जो कि एक कंज्यूमर इनसाइट्स और ब्रांड इंटेलीजेंसी कंपनी है जो कि अंशधारकों की खरीदारी के रूझानों को समझते हुए उनका अध्ययन करती है। ये प्रक्रिया दो वैश्विक तौर पर प्रतिष्ठित ब्रांड ट्रस्ट और ब्रांड अट्रेक्टिवनेस के प्रॉपेटरी मैट्रिक्स के माध्यम से संबंधित ग्राहकों के प्रति अवधारणा को समझती और अध्ययन करती है। टीआरए रिसर्च ग्राहकों और अन्य अंशधारकों के साथ एक प्राइमरी रिसर्च करती है ताकि उन्हें ग्राहकों के व्यवहार की आंतरिक जानकारी के आधार पर अपने कारोबारी फैसले करते हुए ब्रांड्स को स्थापित करने में मदद मिल सके। 

टीओआर रिसर्च, कोविड-19 संकट के दौरान और बाद में उन्हें उपभोक्ता और ग्राहक की अपेक्षाओं के अनुरूप बनाने में मदद करने के लिए ब्रांड्स को कंसल्टिंग प्रदान कर रहा है। टीआरए रिसर्च, टीआरए ज ब्रांड ट्रस्ट रिपोर्ट और टीआरए मोस्ट डिजायर्ड ब्रांड्स की भी प्रकाशक है।

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