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Divine Solitaires

स्वच्छता के लिए हीरों की बाजारी कीमत पर पैनी नजर रखना ज़रूरी :जिग्नेश मेहता 

कोलकाता, नि.सं I जिग्नेश मेहता, फाउंडर एवं प्रबंध निदेशक, डिवाइन सॉलिटेयर्स ने कहा है कि किसी भी व्यवसाय में अगर पूरी तरह से स्वच्छता हो तो वह ग्राहकों के अंदर एक विश्वास पैदा करता है. जो आपकी ब्रांड के इमेज को तैयार करता है. जेम ऐंड ज्वेलरी उद्योग में भी यही शर्ते लागू होती है. भारत की जेम ऐंड ज्वेलरी इंडस्ट्री विश्व की सबसे बृहत् इंडस्ट्री में से एक है, जिसका वैश्विक गहनों की खपत में 29 प्रतिशत का योगदान है.

एक रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल भारत हीरों का सबसे बड़ा आयातक और निर्यातक है. भारत दुनिया में सबसे ज्यादा हीरे का निर्यात करता है. भारत से हर साल 20 अरब डॉलर हीरे का निर्यात होता है और हर साल करीब 16 अरब डॉलर मूल्य का हीरे का आयात होता है.

मेहता का कहना है, कट, कलर, कैरट एवं क्लैरिटी के आधार पर हीरों का मूल्यांकन होता है.वैसे देखा जाए तो डेप्थ एवं फ्लोरेसेंस की वजह से भी हीरो की कीमतों में भी परिवर्तन होता है. जब कभी कीमतों में परिवर्तन होता दीखता है, तब अधिकतर ज्वेलर्स ग्राहकों को हीरों की गलत कीमत बता देते हैं, जो बिलकुल गलत है. इसलिए हीरो के सही मूल्य के लीये डीपीआई की ज़रुरत होती है. 

मेहता ने आगे कहा, डिवाइन सॉलिटेयर्स ने द सॉलिटेयर प्राइस इंडेक्स(एसपीआई) को अपनाया है, जो कीमतों के मामलों में डायमंड इंडस्ट्री में ट्रांसपेरेंसी के साथ-साथ स्टैंडर्डाइजेशन मेंटेन करता है. हर महीने एसपीआई हीरों के मूल्यों की उतर चढ़ाव को बतातात है एवं यही एक इंडेक्स है जो उपरोक्त मामलों में सर्वोत्तम है. 

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