No icon

पूर्वी भारत में पहली बार गर्भ में रक्त चढ़ाकर कोलकाता के अपोलो मल्टीस्पेशिएलिटी अस्पताल में एक अजन्मे बच्चे की बचाई गई जान

-गर्भ में कई बार रक्त चढ़ाने के बाद पैदा हुआ स्वस्थ बच्चा

कोलकाता, 27 अक्टूबर, 2021: पूर्वी भारत में पहली बार, अपोलो मल्टीस्पेशिएलिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने गर्भ में रक्त चढ़ाकर  एक अजन्मे बच्चे को नया जीवन दिया है। गर्भावस्था के 24वें सप्ताह के दौरान रीमा की फोएटल हाइड्रोप्स की एक दुर्लभ जटिलता का निदान किया गया था, जिसमें तरल पदार्थ फोएटस में जमा हो जाते हैं, जिससे बच्चे को एनीमिया हो जाता है।

गर्भावस्था के दौरान फोएटल हाइड्रोप्स एक दुर्लभ समस्या है, जो दूसरी बार गर्भावस्था में होती है, जब माँ का रक्त समूह ए - (नकारात्मक) होता है और पिता का रक्त समूह बी+ (सकारात्मक) होता है। ऐसे मामलों में यदि पहला बच्चा सकारात्मक रक्त समूह के साथ पैदा होता है, तो संभावना है कि माँ का शरीर प्रसव के बाद छोड़ी गई सकारात्मक कोशिकाओं से लड़ता है। इन एंटीबॉडी की उपस्थिति ही दूसरी गर्भावस्था के दौरान अजन्मे बच्चे को प्रभावित करती है। इसलिए फोएटस में मौजूद रक्त द्रव में बदल जाता है और बच्चे की छाती, पेट और त्वचा के नीचे जमा हो जाता है। फोएटल हाइड्रोप्स वाले शिशुओं की मृत्यु दर 50% से 90% होती है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि इस बीमारी का पता कितनी जल्दी चलता है।

अपोलो मल्टीस्पेशिएलिटी अस्पताल के डॉ. मल्लिनाथ मुखर्जी ने कहा, "ऐसे मामलों में, अजन्मे को रक्त चढ़ाकर ही जीवन को बचाने का एकमात्र तरीका है। इलाज के बाद भी ऐसे बच्चों के जीवित रहने की दर बेहद कम है। इस मामले में हमें 6 बार रक्त चढ़ाने के बाद 35 सप्ताह की गर्भावस्था में बच्चे को सफलतापूर्वक जन्म करवाने में मदद मिली। हम इस विशेष डिलीवरी के लिए विश्वास जताने और अनुमति देने के लिए राज्य के स्वास्थ्य विभाग के भी आभारी हैं।”

रक्त चढ़ाने वाले अपोलो मल्टीस्पेशिएलिटी अस्पताल के डॉ. कंचन मुखर्जी ने कहा, “भ्रूण में रक्त चढ़ाने की प्रकिया अत्यंत नाजुक और महत्वपूर्ण होती है इसलिए हमें प्रक्रियाओं के दौरान बच्चे और माँ का अत्यधिक ध्यान रखना पड़ता है। छह बार रक्त चढ़ाने के बाद, हम बच्चे के हीमोग्लोबिन को 3 से 10 तक बढ़ाने और समय पर प्रसव की व्यवस्था करने में सक्षम हुए।”

अपोलो मल्टीस्पेशिएलिटी अस्पताल, कोलकाता के निदेशक और एचओडी, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी डॉ. जयंत कुमार गुप्ता ने कहा, “हम यहां पूर्वी भारत में पहली बार अपोलो में एक अजन्मे बच्चे को रक्त चढ़ाकर फोएटल हाइड्रोप्स की स्थिति में इस दुर्लभ से बच्चे के जीवन को बचाने में सक्षम हुए हैं।  

रक्त चढ़ाने के बाद भी, प्रसव का समय तय करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। अजन्मे में रक्त चढ़ाने के कई जोखिम कारक होते हैं, जैसे गर्भ में संक्रमण के कारण समय से पहले प्रसव, बहुत अधिक रक्त चढ़ाने के कारण बच्चे का हृदय गति रुकना और यहां तक कि यदि रक्त माँ तक पहुँच जाता है तो माँ की मृत्यु भी हो जाती है।”

वहीं डॉ. सुमना हक, कन्सलटेंट, फोएटल मेडिसीन ने कहा, फोएटल हाइड्रोप्स के ट्रीटमेंट के लिए सरकारी परमिशन की ज़रूरत होती है. और यह परमिशन हमें मिली थी जिस वजह से यह सम्भव हो पाया है.

डॉक्टरों ने शादी से पहले ब्लड ग्रुप चेक करने और गर्भावस्था के दौरान इस तरह की परेशानी से बचने के लिए जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी। एंटी डी इम्यूनो ग्लोब्युलिन जैसे कई एंटीडोट्स हैं, जो पहली डिलीवरी के बाद माताओं को दूसरी गर्भावस्था में फोएटल हाइड्रोप्स की समस्या से बचने के लिए दिए जाते हैं।

 

Comment